राजनीति में काम करोगे

*लखीमपुर खीरी की घटना ने एक बार फिर प्रमाणित कर दिया कि राष्ट्रवादी सत्ता चाहे कितनी भी मजबूत हो, अकेली अवश्य पड़ जाती है।*

*योगी आदित्यनाथ अकेला एक तरफ और दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाडरा, आम आदमी पार्टी का संजय सिंह, सतीश चंद्र मिश्रा समाजवादी पार्टी, तीन राज्यों के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल छत्तीसगढ़, चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब, ममता बनर्जी बंगाल, खालिस्तान आयोजित मायावी आंदोलनकारी, चंद्रशेखर रावण, टुकड़े-टुकड़े गैंग समेत तमाम दरबारी मीडिया।*

*हद तो तब हो गई जब स्वयं को राष्ट्रवादी बताने वाले योगी आदित्यनाथ के समर्थक भी योगी आदित्यनाथ को ललकारते नजर आए।*

*अकेले योगी आदित्यनाथ ने सब को संभाला। प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव को हिरासत में लिया। मृतक आंदोलनकारियों के परिवार से समझौता के नाम पर राकेश टिकैत को घुटने टिकवाया। लखीमपुर खीरी पहुंचने वाले तमाम वामपंथी गिद्धों को प्रवेश नहीं करने दिया। चरणजीत सिंह और भूपेश बघेल जैसे ब्रांडेड गिद्धों को आसमान में ही रोक दिया।*

*बंगाल में ऑन रिकॉर्ड भाजपा के 55 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के ऑफिशियल बयान के अनुसार एक लाख लोग असम की सीमा पर जान की सुरक्षा को लेकर पलायन कर गए। फिर भी नरसंहार की अकेली जवाबदेह ममता बनर्जी कभी अकेली नहीं पड़ी। ममता का ना कोई सहयोगी दल है ना ही कोई टीएमसी का दूसरा चेहरा। बावजूद ममता आज भी यह कहने की स्थिति में है कि उत्तर प्रदेश रामराज्य नहीं किलिंग राज्य है।*

*राष्ट्रवादी पक्ष का यह हाल कोई नया नहीं है। मामला चाहे ट्रेन में कारसेवकों के जिंदा जलाने का हो, चाहे कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का। चाहे मामला डायरेक्ट एक्शन डे का हो चाहे मामला मोपला नरसंहार का। संघर्ष अकेले ही करना पड़ता है। क्या फर्क पड़ता है देश में Subhash Chandra BOS जैसा महापुरुष हो चाहे निश्चलानंद जैसे पूजनीय शंकराचार्य पदाधीश।*

*आज योगी आदित्यनाथ को भी राष्ट्रहित की लड़ाई, समाजहित की लड़ाई तथा लोकहित की लड़ाई अकेले लड़नी पड़ रही है। कोई नई बात नहीं।*

*विचार कीजिये*

Comments

Popular posts from this blog

Buxar गरीबों का घर हुआ जलकर राख समाजसेवि मिथिलेश पाठक ने किया आर्थिक मदद